Essay on Child Labour in Hindi: बाल श्रम एक अभिशाप

By | अगस्त 21, 2021

Essay on Child Labour in Hindi: बाल श्रम हमारे जीवन पर एक अभिशाप है| आज भी बहुत से बच्चे शारीरिक, यौन और भावनात्मक दुरुपयोग के अधीन हैं। गरीबी का उच्च स्तर और खराब स्कूली शिक्षा स्तर की वजह से भारत देश में बाल श्रम हर जगह देखने को मिलता है। इस हिंदी ब्लॉग के “Essay in Hindi” की श्रंखला में “बाल श्रम एक अभिशाप को सम्मिलित किया गया है।

Essay on Child Labour in Hindi - बाल श्रम

Essay on Child Labour in Hindi

(बाल श्रम एक अभिशाप)

प्रस्तावना

भारत में सभी बच्चे अपने बचपन का आनंद लेने के लिए भाग्यशाली नहीं हैं। उनमें से बहुत से अमानवीय परिस्थितियों में काम करने के लिए मजबूर हैंजहां उनके दुःखों का कोई अंत नहीं है। यद्यपि बाल श्रम पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून हैं फिर भी बच्चों को सस्ती श्रम के रूप में शोषित करना जारी है। 

भारत में बाल श्रम पर अभी तक रोक लगाने में अभी तक कामयाबी नहीं मिलीबाल श्रम केवल ग्रामीण क्षेत्र में ही नहीं बल्कि शहरी क्षेत्रों में भी पाया जाता है। 1991 की जनगणना में 11.28 मिलियन तथा 2001 में 12.59 मिलियन बाल मजदूरों की संख्या के आंकड़े मिलते हैं। 

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बाल श्रम का अर्थ (Essay on Child Labour in Hindi)

बाल श्रम का शाब्दिक अर्थ 14 वर्ष से काम उम्र के बच्चों को उनके बचपन से ही श्रम या मजदूरी करने के लिए विवश किया जाये। या सामान्यतः बच्चों को बचपन से ही पैसों का या अन्य कोई लालच देकर मजदूरी करवाई जाये तो यह बाल श्रम की श्रेणी में आता है। 14 वर्ष से काम आयु के बच्चों को उनके बचपन से अलग करके शोषण करना और मजदूरी करवाना बाल श्रम ही है। यह शोषण कई प्रकार के हो सकते हैं। खेल कूद से वंचित करना, शारीरिक रूप से शोषण करना, मानसिक रूप से शोषण करना, सामाजिक रूप से शोषण करना, शिक्षा के अधिकार से दूर रखना, काम पैसों में काम करवाना, इत्यादि।

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भारतीय संबिधान और बाल श्रम

भारतीय संबिधान में भी 24 वें अनुच्छेद में 14 वर्ष से काम आयु के बच्चों से मजदूरी करना अनुचित है। संबिधान में बच्चों द्वारा कारखानों में, ढावे में, होटलों में तथा घरेलु नौकर के रूप में काम करवाना बाल श्रम या बाल मजदूरी का ही रूप है। एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय समाज में 35 मिलियन से भी अधिक 14 वर्ष से काम आयु के बच्चे बाल मजदूरी के शिकार हैं रिपोर्ट के अनुसार भारतीय समाज में सर्वाधिक बाल मजदूर वाले राज्य हैं।:- बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान इत्यादि।

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बाल श्रम के कारण (Essay on Child Labour in Hindi)

अगर हम बाल मजदूरी की बात करें तो निम्न कारण हैं:-

  • बाल श्रम का मुख़्य कारण देश में फैली गरीबी हो सकती है। इस गरीबी के कारण परिवार की आजीविका चलने में खुद को असमर्थ समझने लगते हैं। फलस्वरूप, अपने बच्चों को बाल श्रम करने पर विवश कर देते हैं।
  • शिक्षा का अभाव भी बाल मजदूरी का कारण बनता है। परिवार के बड़े सदस्यों या माता पिता का लालची होना भी है। बाल मजदूरी का कारण देश में असंख्य बच्चों का अनाथ होना भी हो सकता है। जिन्हे लालची और समाज के ढेकेदार लोग बच्चों को डरा धमकाकर भीख मांगने या मजदूरी करने पर विवश कर देते हैं।
  • परिवार में कोई भी कमाने के लायक न होने पर भी मजबूरीवश बच्चों को कार्य करना पड़ रहा है। बाल मजदूरी का बढ़ता क्रम बढ़ती हुई जनसँख्या वृदि का कारण हो सकता है। बढ़ती जनसँख्या से मूल्य में वृदि भी होने से परिवार का भरण पोषण नहीं हो पाता है। अतः बच्चों को मजबूर कर दिया जाता है।
  • समाज में व्याप्त भ्रस्टाचार भी बाल मजदूरी कराने में अहम् भूमिका निभाता है। भृष्ट लोग पकडे जाने पर आसानी से छूट जाते हैं।
  • बाल श्रम या बाल मजदूरी को रोकने में बने कानून का भी सही से पालन न होना भी कारण हो सकता है।

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बाल श्रम के दुष्परिणाम (Essay on Child Labour in Hindi)

हर मानव या हर प्राणी का सबसे सुनहरा समय उसका बचपन ही होता है। क्यूंकि बचपन में वह जी भर के खुशियां बटोरता है। वह बचपन में ही सबसे अधिक अपने माता पिता और अन्य लोगों से प्रेम पाता है। वो जो चाहे उसे मिलता है।, जो खेलना हो खेलता है। जो पड़ना चाहे पड़ता है। जो खाना चाहे खाता है। लेकिन बाल श्रम जैसे घिनौने कार्य के कारण कुछ बच्चे अपना बचपन नहीं जी पाते हैं। क्यूंकि वह बाल मजदूरी करने पर विवश कर दिया जाता है। बाल श्रम या बाल मजदूरी के दुष्परिणाम निम्न हो सकते हैं।:-

  • बाल श्रम से सम्बंधित बच्चे अक्सर कुपोषण जैसी भयानक बीमारी का शिकार हो जाते हैं।
  • कुछ बच्चों का शारीरिक शोषण होता रहता है।
  • गलती करने पर बाल श्रम में लगे बच्चों को मानसिक रूप से परेशान और पीटा जाता है। अतः कुछ बच्चे मानसिक रूप से बीमार हो जाते हैं।
  • बाल श्रम में लगे बच्चे न तो साक्षर हो पाते हैं और न ही कोई नौकरी कर पाते हैं। अतः वे गरीब के गरीब ही रहते हैं।
  • बाल श्रम से योग्य और प्रतिभाशाली बच्चे न तो अपने लिए कुछ कर पाते हैं और न ही देश के विकास में योगदान दे पाते हैं।

वर्तमान में बाल श्रम में लगे शारीरिक शोषण के शिकार बच्चों का प्रतिशत लगभग 40% है।

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बालश्रम रोकने के उपाय (Essay on Child Labour in Hindi)

बालश्रम जैसे अभिशाप को भारत के समाज से दूर करना बहुत आवश्यक है। क्यूंकि बिना बाल श्रम से मुक्ति दिलाय न तो देश का विकास सही से संभव है और न ही समाज में बाल श्रमिकों को उनके अधिकार मिल सकते हैं। बाल श्रम को रोकने के कई उपाय हैं।:-

  • बाल शुभ को जड़ से समाप्त करने के लिए आवश्यक है की सख्त कानून बनें। इससे लोग बच्चों को काम पर रखने से पहले डरेंगे।
  • बाल श्रम को रोकने में लोगों को खुद को बदलना होगा।
  • अगर कोई बच्चा बाल श्रम करता दिखे तो तुरंत पुलिस को बताये।
  • कारखानों या दुकानों में लोगों को बच्चों को काम पर रखने से सख्ती से मना करना चाहिए।
  • हमारे समाज के हर व्यक्ति को बच्चों को बालश्रम रोकने के पुरे प्रयास करना होगा। उन्हें साक्षर बनाने की कोशिश करना होगा।

बाल श्रम रोकने में सरकार द्वारा किये गए कार्य

सरकार द्वारा किये गए कार्य हैं।:-

  • चाइल्ड लेबर एक्ट – 1986

इस कानून के अनुसार 14 वर्ष से काम आयु के मासूम बच्चों से काम कराना दंडनीय अपराध होगा।

  • जुवेनाइल जस्टिस ऑफ़ चिल्ड्रन एक्ट – 2000

इसके अनुसार बच्चों को मजदूरी करवाने या मजबूर करने पर कड़ी कार्यवाही होगी।

  • राइट ऑफ़ चिल्ड्रन एक्ट – 2009

इसके अनुसार प्राइवेट स्कूलों में गरीब बच्चों के साथ विकलांग बच्चों के लिए 25% सीटों की संख्या आरक्षित की गई है।

निष्कर्ष

गरीबी, सामाजिक सुरक्षा की कमी, अमीर और गरीबों के बीच बढ़ता अंतर, किसी भी अन्य समूह की तुलना में बच्चों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। हम सार्वभौमिक शिक्षा प्रदान करने में नाकाम रहे हैं| जिसके परिणामस्वरूप बच्चों को स्कूल छोड़ना और श्रम शक्ति में प्रवेश पड़ता है। 

अस्वास्थ्यकर परिस्थितियों के अंतर्गत श्रम में लगे बच्चों को मुक्त करने के लिए सरकार के अधिकारियों और नागरिक समाज संगठनों को अग्रानुक्रमित करने की आवश्यकता है। उन्हें शोषक कामकाजी परिस्थितियों से बचाया जाना चाहिए और पर्याप्त शिक्षा के साथ समर्थित होना चाहिए। 


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