Essay on Raksha Bandhan in Hindi (राखी): रक्षाबंधन पर निबंध

By | अगस्त 13, 2021

Essay on Raksha Bandhan in Hindi: रक्षा बंधन का अर्थ रक्षा करने वाले धागे से है। यह भाई बहन के असीम निस्वार्थ प्रेम का प्रतीक माना जाता है। इस हिंदी ब्लॉग के “Essay in Hindi” की श्रंखला में “Essay on Raksha Bandhan in Hindi (रक्षाबंधन पर निबंध) को सम्मिलित किया गया है।

रक्षा बंधन और मुहूर्त (2021)

  • वर्ष: 2021 (रविवार)
  • पूर्णिमा तिथि: 21 अगस्त (शाम 07 बजे से) – 22 अगस्त (शाम 05 बजकर 31 मिनट तक)
  • पूजा मुहूर्त: 22 अगस्त (सुबह 06 बजकर 15 मिनट से – शाम 05 बजकर 31 मिनट तक)
  • राखी बांधने का मुहूर्त: 22 अगस्त (दोपहर 01 बजकर 42 मिनट से – शाम 04 बजकर 18 मिनट तक)
  • भद्राकाल: 22 अगस्त (कोई भद्राकाल नहीं)
  • राहु काल: 22 अगस्त (शाम 05 बजकर 16 मिनट 31 सेकंड से – शाम 06 बजकर 54 मिनट 05 सेकंड तक)

Essay on Raksha Bandhan in Hindi

Essay on Raksha Bandhan in Hindi (राखी)

(रक्षाबंधन पर निबंध)

इस पावन पर्व में भाई के कलाई पर रेशम का रक्षा सूत्र बहिनों द्वारा बंधा जाता है। और भाई अपनी बहिन की जीवन भर रक्षा करने हेतु बचनबद्ध हो जाता है। यह हिन्दू और जैन धर्म का पवित्र त्यौहार श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। रक्षा बंधन को कुछ अन्य नामों से भी जाना जाता है, जैसे – राखी, श्रावणी, सलोनी।  रक्षा बंधन एक अद्भुत उत्सव है, जो सामाजिक और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देता है। इस उत्सव से लोगों में आपसी प्रेम और सौहार्द की भावना जागृत होती है।

भाई बहन का अजीब रिश्ता होता है। वैसे तो बचपन से लेकर अंत तक आपस में छोटी – छोटी बातों को लेकर झगड़ते रहते हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर सच्चे मित्र की भांति साथ भी देते हैं।

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रक्षा बंधन मनाने का परंपरागत तरीका:

रक्षा बंधन के दिन से कुछ दिन पहले ही युवतियां अपने भाई के लिए सुन्दर रेशम की राखी, स्वादिष्ट मिठाइयां, अक्षत, इत्यादि खरीदती हैं। रक्षा बंधन वाले दिन बहिनें सुन्दर और नए वस्त्र पहनकर अपने भाई की पूजा करती हैं, और फिर राखी को भाई की कलाई में बांधती हैं। बहनें ईश्वर से अपने भाई की सलामती की कामना करती हैं। तो वहीं भाई बहिन के निस्वार्थ प्रेम को साक्षी मानकर जन्म भर साथ निभाने और रक्षा करने के लिए वचनवद्ध हो जाता है।

इस प्रकार पुरे दिन भर ख़ुशी का माहौल बना रहता है। तरह – तरह के स्वादिस्ट व्यंजन बनते हैं। सगे सम्बन्धी आते हैं, और ईश्वर से आपसी प्रेम बने रहने की कामना करते हैं। 

भाई बहन का अजीब रिश्ता होता है। वैसे तो बचपन से लेकर अंत तक आपस में छोटी – छोटी बातों को लेकर झगड़ते रहते हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर सच्चे मित्र की भांति साथ भी देते हैं।

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Essay on Raksha Bandhan in Hindi (राखी)

(रक्षाबंधन पर निबंध)

रक्षा बंधन के शुभ उत्सव का इंतज़ार हर बहिन बहुत ही बेसब्री के साथ करती है। कि कब रक्षा बंधन आये और वह अपने भाई की कलाई में राखी बांधे, और खुशियां मनाए।

रक्षा बंधन मनाने का उद्देश्य:

अगर हम रक्षा बंधन उत्सव को मनाने के पीछे उद्देश्य की बात करें, तो यह कई हैं:-

  • आपसी प्रेम की भावना को विकसित करना।
  • लोगों के आपस में आये मनमुटाव, शत्रुता को दूर करना।
  • परिवार में खुशियों का संचार करना, जिससे लोग खुश रह सकें।
  • पारिवारिक रिश्तों में मजबूती लाना।
  • राष्ट्रीय एवं सामाजिक एकता को मजबूत बनाये रखना।

जैसे ही सावन आता है, तो लोगों के अंदर खुशियों का सैलाब उमड़ पड़ता है। युवतियां झूलों पर झूलती हैं, और मधुर – मधुर सावन के गीत गाती हैं। यह तब तक चलता रहता है जब तक रक्षा बंधन का पावन पर्व का दिन न आ जाये।

“आया है, आया है, सावन आया है। लाया है, लाया है, साथ में रक्षा बंधन लाया है।”

“रक्षा बंधन में समाया है भाई बहन का प्यार। इस नाजुक बंधन को माने सब सब संसार।”

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भारत सरकार द्वारा सरकारी प्रबंध (Essay on Raksha Bandhan in Hindi):-

रक्षा बंधन के पवन पर्व पर सभी बहनों को डाक विभाग द्वारा डाक सेवा पर अमूल्य छूट की सौगात दी जाती है। इस रक्षा बंधन के खास दिन पर 10/- वाले लिफाफे में 4 से 5 राखियां एक साथ अपने भाई को एक साथ भेज सकती हैं। जबकि 20 ग्राम वाले लिफाफे में केवल 1 राखी ही भेजी जा सकती है। अगर हम भारत की राजधानी दिल्ली की बात करें तो, रक्षा बंधन के शुभ उत्सव के दिन बस, ट्रेन, तथा मेट्रो में सभी युवतियों के लिए फ्री टिकट की व्यवस्था रहती है।

Essay on Raksha Bandhan in Hindi (राखी)

(रक्षाबंधन पर निबंध)

रक्षा के बंधन अर्थात रक्षा बंधन का महत्व पौराणिक कथाओं से भी सम्बंधित है। ये पौराणिक कथाएं हैं:-

भगवान् श्री कृष्ण और द्रौपदी से सम्बंधित कथा:

यह कथा महाभारत से सम्बंधित है। इस कथा के अनुसार, ” पांचो पांडव और भगवान् श्री कृष्ण एक साथ मिलकर पतंग को उड़ने का आनंद ले रहे थे। इसी बीच में श्री कृष्ण की उंगली में चोट लगने से खून निकलने लगा। यह देखकर पांडवों की पत्नी द्रौपदी ने अपने वस्त्र से छोटा सा चीर फाड़कर तुरंत उनकी उंगली पर बाँधा। इस निस्वार्थ प्रेम भावना को देखकर श्री कृष्ण ने द्रौपदी की रक्षा करने का वचन दे दिया। जब हस्तिनापुर के क्रीड़ा भवन में कौरवों द्वारा द्रौपदी का चीर हरण हो रहा था, तब भगवान् श्री कृष्ण ने द्रौपदी के सम्मान की रक्षा करके अपना दिया हुआ वचन निभाया।

रानी कर्मवती और हुमायूँ की कहानी:

यह कहानी तब की है जब बहादुर शाह द्वारा मेवाड़ पर आक्रमण हुआ। अतः मेवाड़ और राजपूतों की रक्षा के लिए रानी कर्मवती ने मुग़ल सम्राट हुमायूँ को राखी भेजकर रक्षा करने की मदद मांगी। अतः हुमायूँ ने तुरंत ही मेवाड़ और राजपूतों की रक्षा भी की।

सिकंदर की पत्नी और पोरस (पुरूवास) से सम्बंधित रक्षा बंधन की कथा:

सिकंदर महान की पत्नी ने अपने मुँह बोले भाई पोरस को राखी बांधकर सिकंदर को न मरने का वचन लिया। अतः जब सिकंदर और पोरस के मध्य युद्ध हुआ, तब पोरस ने सिकंदर को जीवन दान दे दिया।

स्वर्ग के राजा इंद्र और रक्षा का बंधन:

यह कथा तब की है जब स्वर्ग के राजा इंद्र दानवों से अपना सब कुछ हर गए थे। हारे हुए इंद्र ने देवगुरु बृस्पति से रक्षा की गुहार की। तब देवगुरु वृहस्पति ने एक सूत्र को अभिमंत्रित करके इन्द्राणी को दे दिया। इस सूत्र को इन्द्राणी ने इंद्र की कलाई पर बाँधा। जिसके फलस्वरूप इंद्र को अपना खोया हुआ राज – पाठ वापस मिल गया।

जिस मंत्र से देवगुरु वृहस्पति ने सूत्र को अभिमंत्रित किया था, वो है :-

“येन बद्धो बलिराजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामभिवघ्नामि रक्षे माँ चल माँ चलाः।”

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Essay on Raksha Bandhan in Hindi (राखी)

(रक्षाबंधन पर निबंध)

रक्षाबंधन का साहित्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

रक्षा बंधन और साहित्य:-

अगर हम रक्षाबंधन का साहित्य में स्थान की बात करें तो अनेक ऐसे साहित्य हैं, जिनमें रक्षा बंधन का वर्णन मिलता है। जैसे:- “रक्षाबंधन नाटक”, यह हरिकृष्ण प्रेमी द्वारा रचित है। यही नहीं रक्षा बंधन पर कई भारतीय फिल्में भी बानी हैं। जैसे:- “राखी (1962)”, यह ए. भीमसिंह ने बनाई है। “राखी और हथकड़ी (1972)”, यह एस एम सागर द्वारा बनाई गई है।

साहित्य के क्षेत्र में रक्षा बंधन का योगदान यही समाप्त नहीं होता है। भारतीय सिनेमा में कई ऐसे गीत हैं जो भाई बहन के मध्य प्रेम की अभिव्यक्ति दर्शाते है।

जैसे कुछ गीतों की टाइटल लाइन हैं।:-

” भईया मेरे राखी के बंधन को निभाना”

“मेरे भैया मेरे चंदा मेरे अनमोल रतन”

Essay on Raksha Bandhan in Hindi (राखी)

(रक्षाबंधन पर निबंध)

स्वतंत्रता संग्राम में रक्षा बंधन की भूमिका:-

हमारे देश को स्वतंत्र करने में रक्षा बंधन की भूमिका सराहनीय है। उस समय जन – जागरण अत्यंत आवश्यक था। क्यूंकि बिना जन – जागरण के स्वतंत्रता संभव ही नहीं थी। ऐसे में लोगों को एकजुट करना बहुत मुश्किल था। अतः रक्षाबंधन का सहारा लिया गया।

रक्षा बंधन ने स्वतंत्रता संग्राम में इस प्रकार भूमिका निभाई:-

  • जन – जागरण की अभूतपूर्व कामयाबी मिली।
  • हिन्दू – मुश्लिम तथा अन्य सभी धर्मों के मध्य का टकराव समाप्त हुआ।
  • राष्ट्रीय एकता में मकबूती आये।
  • देशवाशियों के अंदर हीन – भावना समाप्त हुई।

रक्षा बंधन और आधुनिक युग (Essay on Raksha Bandhan in Hindi):-

आज के समय में रक्षा बंधन उत्सव मनाने में इंटरनेट (Internet) का योगदान सराहनीय है। परंपरागत तरीके से यह उत्सव न मना सकने वालों के लिए इंटरनेट बहुत काम का है। बहनें ऑनलाइन राखी खरीदकर अपने दूर दराज़ स्थित भाई को बड़े आसानी से ऑनलाइन राखी भेज भी सकती हैं।

निष्कर्ष: रक्षा बंधन का पर्व हमारे भारतीय समाज में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस पर्व के दौरान शत्रु भी मित्र बन सकते हैं। यहाँ तक की यह पर्व लोगों में प्रेम भावना को विकसित करता है। यह राष्ट्रीय एकता, समाजिक एकता को एक सूत्र में पिरोता की कोशिश करता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है की यह पर्व सभी धर्मों के व्यक्तियों में आपसी समन्वय की भावना को उजागर करता है।


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